भेड़ो में शेर का बच्चा

  

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मैं हूँ शब्दवाणी और आपके लिए लेकर आई हु। 

इन्दियां रूपी भेड़े और मन रूपी गड़रिया के संग 

के सारसहित एक घटना पर आधारित कहानी अगर 

कहानी अच्छी लगे तो दोस्तों और अपने चहेतों को शेयर करें।   

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      भेड़ो में शेर का बच्चा 

एक बार एक शेरनी ने बच्चे को जन्म दिया। 

बच्चे को जन्म देकर शेरनी कंही चली गई और बच्चा 

माँ से बिछुड़ गया। एक गड़रिया रोजाना जंगल में 

भेड़ चराने जाता था, उसने जब असहाय शेर के 

बच्चे को उठा लिया और भेड़ो का दूध 

पिला-पिला कर उसे पल लिया। भेड़ो के साथ 

रहते-रहते उस शेर की आदत भेड़ जैसी हो गई। 

भेड़ो की तरह वह भी घास खाता और उन्ही की 

तरह उसमे भी डरपोक पना आ गया । धीरे धीरे शेर 

का बच्चा बड़ा हो गया ।

इत्तफाक से एक शेर की नजर जब उस रेवड़ पर 

पड़ी तो उसने देखा की एक शेर का बच्चा भेड़ो के 

साथ घूम रहा है। उस शेर को आश्चर्य हुआ 

की शेर उसके पास गया तो डर के मारे वह भागने 

लगा। शेर ने उससे कहा कि डरो नहीं, मै तुम्हे नहीं 

खाऊँगा। तुम तो मेरी ही जाती के हो और अपनी 

खुराक तो ये भेड़े हैं। शेर का बच्चा बोला- नहीं, मै 

भेड़ हूँ और ये भेड़े मेरा परिवार है। शेर ने कहा-

नहीं, तू शेर है और वह उसे नदी के किनारे ले गया 

और पानी में अपनी और उसकी शक्ल दिखाकर 

कहा की देख तेरी और मेरी शक्ल एक जैसी है। शेर 

के बच्चे ने जब अपनी शक्ल पानी में देखी तो वह 

बोला-हां, मेरी शक्ल तो आप जैसी है। फिर शेर 

ने उससे कहा- मैं, गरजता हूं, तू भी मेरी तरह 

गरज । शेर गरजा, साथ ही शेर के बच्चे ने भी 

गरजना की  गरजना करने से सारी भेड़े दूर भाग गई ।


हमारी आत्मा,परमात्मा की अंश है और इसमें वे 

सभी गुण मौजूद हैं जो परमात्मा में हैं परन्तु अपने 

पिता परमात्मा से बिछुड़कर जब यह रूह संसार में 

आई तो यहाँ आकर इन्दियां रूपी भेड़े और मन 

रूपी गड़रिया के संग से यह भ्र्म में पड़ गई और 

अपनी हस्ती को भुला बैठी। परन्तु जब इसे शेर रूपी 

संत सतगुरु मिल जाता है तो वह इसके भरमों को 

दूर करके इसे वास्तविकता से अवगत करा देता है। 

इनका अनुशरण करके, हृदय में अपना प्रतिबिंब 

देखती है तो अपने आपको, अपनी हस्ती को पहचान 

लेती है और मन और इन्दियों से मुक्त हो जाती है ।


अच्छी कहानियों को जितना ज्यादा सुनोगे 

उतना ही फायदा हमको मिलता है 



















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